बाहर फसाहुआ पैसा ये ३ उपायोंसे तुरन्त आपतक पहुचेगा - बिनासमय गवायें आजही करिऐं


मानव जीवन में,   पैसा छोड़ हर बात का ढोंग किया जा सकता हैं। पैसों के बिना जिंदगी बिल्कुल भी नहीं चलेगी। सभी लोग कुछभी, किसी भी तरीके  से  तुरंत पैसा बनाने का तरीका ढूंढते रहते हैं, लेकिन अपरिपक्व मानसिकता, दृढ़ता और कार्यान्वयन की कमी के कारण असफल हो जाते हैं। इस स्थिति में कोई भी मदद नही करता है।

इसलिए यदि आप स्थूल आंखों से दिखनेवाले धोखेबाज लोगों की अपेक्षा, स्थूल दुनिया के भी परे सूक्ष्म लोक से अगर कुछ मदद प्राप्त कर सकते हैं तो......? यह सवाल अपने मन से अवश्य पूछें........!  

आजकल दुनिया में विश्वासघात का प्रमाण 99.99% होने के कारण जीवन में हमारी सुनिश्चित मानसिक, शारीरिक, वित्तीय, सामाजिक और आध्यात्मिक प्रगति का सबसे सुरक्षित रास्ता कौन सा है?  यह सवाल उठना स्वाभाविक है। इसीलिए आज गुप्त व  जागृत दैवी साधना  व्यक्त कर रहे है।

मनुष्य चाहे आस्तिक हो या नास्तिक ... वह सहज ही सदैव सात्विक या शाही (राजसी) अथवा तामसिक (तामसी) सूक्ष्म शक्तियों से घिरा रहता है। ऐसी स्थिति में, जो सूक्ष्म विरोधक है  उनका साथ मिल जाए तो... जीवन का सहज ही कायापलट होगा इसमें कोई संदेह नहीं है। 

स्वदैववाद के अलावा, कोई अन्य दुआ  पल भर के लिए भी विश्वसनीय नहीं है। इसी पार्श्वभूमीपर दैववाद द्वारा परमेश्वर को सर्वश्रेष्ठ भक्तिमार्ग के माध्यम से सगुण अथवा निर्गुण भक्तिद्वारा संतुष्ट करने से  वह हमारी इच्छा या जो हमारे लिए सबसे अच्छा है वो प्राप्त कराके देगा, इसके साथ ही कुछ अन्य लौकिक दैवी साधना से भी अवगत हो सकता है।


वित्तीय लाभ ( आर्थिक लाभ) के लिए प्रभावी दिव्य अभ्यास।

मानव जीवन में,   पैसा छोड़ हर बात का ढोंग किया जा सकता हैं। पैसों के बिना जिंदगी बिल्कुल भी नहीं चलेगी।  सभी लोग कुछभी, किसी भी तरीके  से  तुरंत पैसा बनाने का तरीका ढूंढते रहते हैं, लेकिन अपरिपक्व मानसिकता, दृढ़ता और कार्यान्वयन की कमी के कारण असफल हो जाते हैं। इस स्थिति में कोई भी मदद नही करता है।


१. भगवान श्री कृष्ण का दैनिक आदिम (प्राथमिक) स्मरण ...

हर दिन सुबह सूर्योदय से पहले, उठकर शुचिर्भूत हो कर उत्तराभिमुख होकर आसनस्थ होंए।  अपनी आँखें बंद कर के गीत के  निम्न दोहें 18 बार मन ही मन कहें ...

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः l
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतीर्मम ll

इस श्लोक को 18 बार स्मरण करने के बाद मन बहुत प्रसन्न हो जाता है। भगवान  श्रीकृष्ण के श्रीवैभववादी भाव मन में जागृत होते  है।  मन को सहज ही हल्कापन महसूस होने पर ही अगला साधना मार्ग क्रमण फल प्राप्ति की राह के दृष्टिकोण से फायदेमंद होता है। अब निम्न मंत्र का 108 बार जाप करें।

मंत्र : ll श्रीकृष्णः शरणम् मम् ll

यह एक दैनिक किए जाने वाली साधना है।  बिना चुके यह सुबह की दिनचर्या नियमित रूप से करनी चाहिए। अधिकतम 20 मिनट की साधना अपेक्षित है।

इसके अलावा,  निम्नलिखित दी गई साधना हर सोमवार को करनी चाहिए।
२. भगवान शंकरजी की शिवार्चना...
अ.  हर सोमवार को श्रीकृष्ण साधना के बाद नागकेसर लेकर वो अपने घरके शंकरजी की पिंडी को अथवा तस्वीर को अर्पण करें। नागकेसर एक समृद्ध पौधा है। जिन्हें संभव हो उन्होंने शिवमंदिर में जा कर उपरोक्त तरीके से नागकेसर पिंडी के ऊपर अर्पण करना चाहिए और मौन का पालनकरते हुए  घर आना चाहिए। उसके बाद

ब.  हर सोमवार को श्री शिवलमृत के दो अध्याय आसनस्थ होकर पढें। साप्ताहिक पाठ करके कुछ मीठा नैवेद्य बनाकर शंकर जी को चढ़ाएँ। उस दिन पूर्ण शाकाहारी भोजन करें और व्रतस्थ रहें। इस दिन आपके सन्मुख आने वाले  भिखारी या याचक को कुछ धन दान करें। दत्त अन्नछत्र में अन्नदान करें। पितृतृप्ति हेतु तिलों का होम, साधना के आरंभ होने से पहले एकबार तो अवश्य ही करें।

उपरोक्त तरीके से साधना इक्कीस (21) सोमवार करें। आखरी सोमवार को,  पतिव्रतस्थ चरित्रसंपन सुहागिन को भोजन के लिए बुलाकर उसका यथोचित नारियल तथा शगुन देकर उसका सन्मान करिए और उसे देवी स्वरूप समझकर उसे नमस्कार करिए।   यदि आप दृढ़ विश्वास के साथ और सीधे भक्तिमार्ग  के साथ पूजा करते हैं, तो भगवंत आर्थिक राहों को मुक्त करने के  दिशासंकेत अवश्य देते है और अद्भुत तरीके से द्रव्यसहाय्य करते हैं।


३. पैसा वापस मिलने के लिए एक और उपाय बता रहा हूँ...

एक नीले रंग का ड्राइंग पेपर लेकर उसके ऊपर बहुत ही स्पष्ट सा एक स्वस्तिक चिन्ह (दो इंच लंबी चौड़ाई) बनाईये। फिर नागकेसर की डंडियों को पेंसिल से खींचीं गई रेखाओं पर गोंद से हल्केसे चिपका दें।  इस कागज को लगभग तीन फीट दूर रखते हुए, एकाग्र मन से दो से तीन मिनट के लिए उस नागकेसरयुक्त स्वस्तिक चिन्ह को देखें और तुरंत अपनी आँखों बंद कर लें। उस स्वस्तिक की काली आकृति मनःचक्षुओं के सामने आने लगेगी।   सदर आकृति के अस्पष्ट होने पर फिर से आँखें खोलकर 2-3 मिनट के लिए स्वस्तिक को देख कर,  आंखों को बंद करके वह आकृति मनःचक्षु के समक्ष लाएँ।  ऐसा इक्कीस  (21) बार करें।

यह साधना हरदिन करनी है।  सही समय है सूर्योदय या सूर्यास्त के समय का नैसर्गिक प्रकाश......!  इस साधना को लगभग 4 से 6 महीनों के समय देना चाहिए।

संपर्क : श्री. कुलदीप निकम 
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भ्रमणध्वनी : +91 9619011227 
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