घर का मंदिर और घर की दहलीज ऐसे बनवा कर दुर करें दुर्भाग्य


शुद्ध  वास्तुको खरीदने की जिम्मेदारी हमारे हांथों में होती है तो उस खरीदी हुई वास्तु को पवित्र एवं मंगलमय बनाने की जिम्मेदारी घर के मंदिर (देवताओं)  की  होती है।  इसी सन्दर्भ से जुड़ा हुआ ज्ञान अगर हम यथाशक्ति प्राप्त करते हैं तो हमारा जीवन खुशनुमा एवं सुगंधित होगा।

मानव शरीर की प्रकृति के आधार पर, संबंधित  वास्तु के स्थापत्य चित्र की रचना निर्भर करती है। जिस प्रकार मानव शरीर में आत्मा का निवास हृदय का क्षेत्र माना जाता है। इसी तरह, घर में देवघर या पूजा स्थल को घर का केंद्र माना जाता है। इस हृदयभूमि में हम जो आध्यात्मिक संसाधन सृजित करते हैं, उन्हें प्राणप्रतिष्ठा के नाम से भी जाना जाता है। यदि संबंधित साधना सात्विक रूप में की जाती है, तो घर में, सकारात्मक वातावरण के साथ-साथ दिव्य परिवेश के कंपन का अनुभव किया जा सकता है।



जिस प्रकार घर के सभीसदस्य एकदूसरे से प्रेम और सामंजस्य से व्यवहार करते हैं, तो कभी-कभी तनाव के साथ, उसी तरह देवताओं के बीच सामंजस्य और तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है। इसलिए, यदि भगवान के घर को गलत तरीके से या गलत दिशा में स्थापित किया गया है, तो घर में बहसें होती रहती हैं।  हमारे घर के पूजा घर में हमपर अधिकार रखने वाले हमारे कुलदेवता या ग्रामदेवता का स्थान न होने पर हमें , बहुत बड़ी कठिनाइयों का सामना करता पड़ता हैं। लेकिन   हम इस कारण को समझ नहीं पाते हैं। हमारी मानसिक, शारीरिक, वित्तीय, सामाजिक और आध्यात्मिक प्रगति पर हमारे घर के पूजा स्थान या देवघर का बहुत प्रभाव पड़ता है।


घर का मंदिर 

हमारे घर में पूजा स्थान में अपेक्षित देव पंचायतन  (देवताओं की स्थापना/ स्थान) कैसा होना चाहिए इसका कारण विवेचन हम स्वामीसेवा में लिप्त दत्त साधकों को देते रहते हैं।  पूजा स्थान का सबसे महत्वपूर्ण तत्व यानी घर का निधान कुंभ जिसे हम पूजघर का कलश भी कहते है।  कलश को नाममंत्र के जाप से अभिमंत्रित करनेसे वह कुंभ बनता (कहलाता) है।  नए घर में प्रवेश करनेसे पहले कुंभ स्थापित करने की प्रथा भी प्रचलित है। जलपूर्ण कुंभ की तरह  घर भी भावपूर्ण तथा नवपल्लवित रहे ऐसी मंगलमय कामना इसके पीछे होती है।  जलपूर्ण कुंभ के जल की तरह शुद्ध एवं निर्मल स्वभाव घरके वातावरण में बिखरता रहे इसीलिए कुंभ की सूक्ष्मता द्विगुणित करने के लिए कलश पर नारियल यानी श्रीफल  रखनेकी प्रथा है।  इसीलिए घर में नाममंत्र स्वरों के माध्यम से  शक्तिस्वरूप घट की स्थापना कुंभ के स्वरूप में की जाती है।

कलश के अस्तित्व को घर के वास्तुपुरुष एवं रखवाले का अभिन्न प्रतीक माना जाना चाहिए।  जिससे जमीन के भूभार का सामर्थ्य संबंधित देवता और देवदैत्य शक्तियों को प्राप्त होकर, हमें हमारे कार्य सिद्धि में संबंधित शक्तियों की मदद मिल सकती है।  अन्यथा मूर्खता करते रहने पर मदद की जगह संबधित शक्तियों द्वारा अड़चने उत्पन्न होती रहती है।  इसीलिए हमें यथाशक्ति संबंधित ज्ञानर्जित करके सही निर्णय दत्त सेवा के माध्यम से लेने चाहिए और अपने पारिवारिक जीवन को खुशहाल मंगलमय बनाना चाहिए। घर के  पूजस्थान का वास्तविक आत्म-साक्षात्कार के साथ उचित उपाय किया जाना चाहिए, ताकि घर में सकारात्मक स्पंदन फैले।


वास्तु (घर) की दहलीज

प्राचीन काल में, वास्तु (घर)  बनाते समय, शायद ही कोई घर बिना दहलीज के बनता हो।  हर वास्तु में दहलीज होने का कारण महत्वपूर्ण है।  एक महत्वपूर्ण कारण यह है  की  दहलीज घर की आबरू की रक्षा करती है।  दहलीज गृहस्थी का रक्षक है। जिस तरह मानव की नैतिकता बहुत अस्थिर होती है, वैसे ही घर में सुख, खुशियाँ और मंगलमय वातावरण कौन नहीं चाहता?  इसीलिए उनकी अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए दहलीज महत्वपूर्ण है। आज की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि कई नए भवनों की दहलीज नहीं होने के कारण संबंधित घरों में मंगल वातावरण ज़्यादा दिनों तक नही टिक पाता। नतीजतन, घर में दृष्ट शक्तियाँ प्रवेश करके  सब कुछ तहस नहस करती हैं।

दहलीज के होने का महत्व बहुत ही सूक्ष्म और गहरा है। घरके सत्त्व को घर के बाहर अतिक्रमण बचाने के लिए और घर के बाहर की दृष्ट शक्तियों को घर मे प्रवेश करके अतिक्रमण करने से रोकने के लिए दहलीज को एक लक्ष्मण रेखा के रूप में माना जाना चाहिए। घर के सभी सदस्यों की जाँच पड़ताल करने का काम दहलीज करती है इसीलिए दहलीज  को आध्यात्मिक योग से कार्यान्वयित करना चाहिए।  घर में प्रवेश करने वाली सूक्ष्म शक्तियों को सत्यापित करने का कार्य दहलीज करती है। इसलिए, हमें अपने दैनिक आध्यात्मिक साधना के माध्यम से दहलीज की सूक्ष्म पूजा करनी चाहिए।

दहलीज यानी घर की पवित्रता का रक्षक है। हमारे घर का समाचार देनेवाली,  वैभव एवं चरित्र का रक्षण करने वाली लक्ष्मण रेखा दर्शक के साथही मर्यादा का पालन करने के लिए प्रेरित करने वाली दहलीज हर वास्तु के लिए यथाशक्ति स्थिर होनी चाहिए।   जिस तरह घर के दरवाजे पर भगवान की प्रतिमा स्थापित की जाती है, उसी तरह हमारे घर की दहलीज के पास शाम को दिया जलाने से हमारे घर में कभी भी बुरी शक्तियाँ नहीं आएंगी।। इतनी अमोघ शक्ति दहलीज में है। इसका प्रयोग जरूर करके देखिए।

संपर्क : श्री. कुलदीप निकम 
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भ्रमणध्वनी : +91 9619011227 
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