अंकशास्त्र के राज जानिऐ i


मूलांकों का अद्भूतपूर्व सूक्ष्म रूपसे आध्यात्मिक दृष्टिसे परिचय हुआ मानवी जीवन मे आगे चलके घड़ने वाले संकेत और यश अपयश सभी अंकशास्त्र पर निर्भर है।  कोई चरिता या देश काल अथवा परिस्थिति एक दूसरे पर अनुकूल या प्रतिकूल यह देखना पहचानना इसकेलिए अंकशास्त्र का पूरी तरह से उपयोग किया जाता है। अंकशास्त्र ये संख्या की भाषा है।  शब्द से सभी प्रकृति पुरुष चैतन्य होते है।  पर संख्या योग द्वारा अधिक परिणामकारक है।  अंक के विद्वान पंडित अंकशास्त्र से किसी भी व्यक्ति या किसीभी समस्या का अनुमान कर सकते है।  कोई सूक्ष्म रूप से घड़नेवाली घटना बता सकते है।


अंकशास्त्र द्वारा मूलांक का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में कैसा बदलाव तथा उन्नति की तरफ ले जा सकता है।  कुछ मूलांक दिशा और यश को बताती है।। इस तरह ये मानवी जीवन के लिए वरदान साबीत होती है।

भाषा का संयोग हर संस्कृति तथा समाज पर दिखाई देता है पर अंको के लिए खुदका एक अंतर्गत परीक्षण है।  वही सांकेतिक भाषा से जान जाता है।  इस मूलांक द्वारा व्यक्ति के स्वभाव तथा भावना नही दिखाई देती। संख्या योग द्वारा सांकेतिक व्यक्ति के बोली से मानसिक , शारीरिक, आर्थिक तथा आध्यात्मिक शुभसंकेत रहस्यमय बातों का पता चलता है।  

दत्तप्रबोधिनी द्वारा अंकशास्त्र के गहराई से अध्ययन करके उसके लाभ बताये जाते है।। मानवी जीवन के भूत, वर्तमान तथा भविष्यकाल के जन्मो से लेकर वृद्धावस्था तक व्यक्तिगत नाम अंकद्वारा जन्मत्तरीख से अंक और व्यवसाय में वृद्धि भाग्यांक से अंक जीवन के होने वाले बदलाव समस्या का योग्य मार्गदर्शन करके अपनी उन्नति कर सकते है। इसमें मंत्र, तंत्र तथा यंत्र का भी उपयोग किया जाता है।  इसमें प्राधान्य व्यक्तिके मूलांक से भाग्यांक द्वारे उसमे सामर्थ्य पैदा किया जा सकता है।  इसके प्रभाव से व्यक्ति का विकास संपन्नता से होता है।

अंकशास्त्र का शिवशक्ति से संबंध

जिस प्रकार अक्षर के दो प्रकार है स्वर और व्यंजन इसमें व्यंजन यानी शिव और स्वर याने शक्ति दोनों का मिलाप करके अक्षर बन जाना है। उसी अक्षर से वाक्य बन जाता है।  प्रत्येक शब्द की शक्ति अलग होती है।  उसमें रहस्यमय ज्ञान छुपा है।  उसी रहस्य को शिवशक्ति स्वरूप में छिपाया है।


भगवान शिवजी का मूलांक ' ९ ' तो भगवती का ' ८ ' है।  शिव शाश्वत अविनाशी अभेद सत्य है।  यह अंकशास्त्र द्वारा समझना सरल है।  जिसमें ९ का  पाढा में मिलाया तो मूलांक  '९' ही होता है। इससे शिव ही ब्रम्हांड का पालन सुजन अंत है। उसके ही आगे शिवतत्त्व जैसेकि तैसा ही शाश्वत है।

इसप्रकार आदिमाता का मूलांक '८' उसी पाढे  से मिलाकर उसमेंसे एक अंक कम करनेसे उससे शक्ति का काल समय नुसार बदल जाता है। विश्व प्रकृति बदल हमेशा विविध आदिभौतिक आदिदैविक तथा आदिअध्यात्मिक ऊर्जा से होता है।  वह बढ़ता है।  घटता है।

मानवी जीवन के रहस्य हम अंकशास्त्रद्वारा आसानीसे समझ सकते है।  अचूक और सूक्ष्म अध्ययन द्वारा दत्तप्रबोधिनी तत्व से दैविय संकेत पा सकते है।  अपना जीवन सुखमय बना सकते है।

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