यदि आप इन 10 आदतों को बच्चों पर लागू करते हैं, तो वे उत्तरोत्तर सम्पूर्ण प्रगति करेंगे।


आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। प्रत्येक माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे अपने जीवन में आत्मनिर्भर, बुद्धिमान, शक्तिशाली और विनम्र हों, लेकिन उन्हें खुद को  जिंदगी में बनाए रखने और जिंदगी की भाग दौड़ जीतने के लिए कुछ मूल्यों को अपनाना ही होगा। अपने बच्चों को मानसिक, शारीरिक, वित्तीय, सामाजिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से पूरी तरह तैयार (लैस) करने के लिए, इस दत्तप्रबोधिनी पोस्ट को पूरा देखें। ताकि आपके परिवार को सही समय पर, सही तरीके से, सही तरीके का उपयोग हो सके।

इस लेख में, मैं वर्तमान और भविष्य में अनुभव होने वाले अतिभयानक और घोर प्रासंगिक काल के अनुसार  सम्पूर्ण 10 आवश्यक आदतों को व्यक्त कर रहा हूं। इन आदतों में से किसी पर भी समझौता किए बिना सभी विषयों को समयबद्ध तरीके से लागू करें। 10 में से 5 आध्यात्मिक आदतों और 5 भौतिक आदतों को व्यापक अर्थों में व्यक्त किया गया है। यह इस प्रकार है ...

कृपया ध्यान दें :  इन आदतों को अपनाने के लिए छोटे बच्चों की कम से कम आयु मर्यादा 10 वर्ष होनी चाहिए।




5 मूल आध्यात्मिक आदतें


  • 1। भगवद् गीता का प्रतिदिन एक अध्याय  बोलते हुए पढ़ने के लिए कहें जिससे,  हकलाना (हकलाहट), वाणी दोष और वाक दोष नहीं होंगे।
  • 2। प्रत्येक मंगलवार को गणपति को 21 बार गणपति अथर्वशीर्ष बोलने के लिए कहें ।
  • 3। बच्चों का ध्यान अध्ययन पर केंद्रित करने के लिए अगली लिंक पर क्लिक करें। यहां क्लिक करें
  • 4। दत्तप्रबोधिनी आध्यात्मिक ऊबंटु का उपयोग करें।  छोटे बच्चों ने भी जिस तरह बताया है उस तरह से श्री स्वामी समर्थ जाप करना चाहिए । इसकी जानकारी के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें।
  • 5। मां, पिता और सद्गुरु के चरणों को स्पर्श करना और माथे पर दत्तविभूती लगाकर ही घर से बाहर निकलना यह आदत बहुत महत्वपूर्ण है।

5 भौतिक आदतें जो आज के कालसमय के अनुसार जीने के लिए आवश्यक हैं।


  • 1। स्कूल , कॉलेज की शिक्षा के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी में बचपन से ही रुचि जगाकर उन्हें विशेषज्ञ बनाए।
  • 2। बच्चे बड़े होने पर उनको जो चाहिए वह व्यवसाय या नौकरी तो करेंगें ही, इसके लिए उन्हें professional website development, You tuber, Social Media Expert, Google Ranker, App developer भी बनने का  प्रशिक्षण दीजिए।
  • 3। व्यक्तित्व, चरित्र और स्थिति को कैसे संतुलित किया जाता है? इसका ज्ञान बचपन से ही देना शुरू करें।
  • 4। बच्चों को दोस्तों से कम से कम मिलने जुलने की मानसिकता सिखाएं।
  • 5। बच्चों को व्यवहार ज्ञान में प्रगत कीजिए।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि बच्चे इन आदतों के माध्यम से चतुर, सतर्क और विचारशील बन जाएंगे। अधिक जानकारी के लिए, दत्तप्रबोधिनी  मस्तिष्क मापन पोस्ट पढ़ें। जिससे उच्च स्तरीय आदि आध्यात्मिक योग उपचार लागू होते हैं। 

संपर्क : श्री. कुलदीप निकम 
Dattaprabodhinee Author )


भ्रमणध्वनी : +91 9619011227 
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